Tuesday, 23 October 2018

उद्यान विभाग की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

उत्तराखण्ड में उद्यान विभाग की नीव वर्ष 1855 में उत्तराखण्ड में बसे व्रितानी नागरिकों एवं मिशनरी द्वारा जिला नैनीताल तथा अल्मोड़ा क्षेत्र में सेब एवं अन्य शीतोष्ण फलों के उत्पादन के साथ रखी गयी। ऐसे ही एक व्रितानी नागरिक मिस्टर क्रो (Mr. Crow) ने चैबटिया गार्डन की स्थापना वर्ष 1869 में वन विभाग में रहते हुये की। मिस्टर क्रो (Mr. Crow) एक प्रशिक्षित एवं अनुभवी व्यक्ति थें, उन्होनें यूरोप से सेब, खुबानी, प्लम, चेरी तथा मलवेरी के पौधों का आयात कर इनकों चैबटिया गार्डन में स्थापित किया। समय के साथ उनके द्वारा चैबटिया गार्डन के आस-पास लगे क्षेत्रों के उद्यान के क्षेत्र में अभिरूचि रखने वाले उत्पादको को भी पौध रोपण सामग्री उपलब्ध कराना प्रारम्भ किया।

वर्ष 1914 में चैबटिया उद्यान को कुमाॅयू कमिश्नर को हस्तान्तरित कर दिया गया। कुमाॅयू कमिश्नर द्वारा अग्रेत्तर विकास हेतु इस उद्यान को मिस्टर नौरमन गिल (Mr. Norman Gill) को हस्तान्तरित किया गया। नौरमिन गिल उद्यान के क्षेत्र में काफी अनुभवी तथा ’’क्यू गार्डन’’ से प्रशिक्षित व्यक्ति थे,उनके द्वारा भी इस उद्यान के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया गया।

पुनः 1922 में चैबटिया उद्यान को कृषि विभाग को हस्तान्तरित कर दिया गया। प्रथम विश्व युद्व के दौरान इस उद्यान की स्थिति बद्त्तर हो गयी, इस कारण पुनः इस उद्यान को वर्ष 1925 में व्यक्तिगत ठेकेदार को हस्तान्तरित कर दिया गया। उसके बाद इस उद्यान की स्थिति बद् से बद्त्तर होती गयी।

पुनः इस उद्यान को वर्ष 1932 में कृषि विभाग को हस्तान्तरित कर दिया गया। इसी वर्ष सेब तथा अन्य शीतोष्ण फलों में विभिन्न समस्याओं के दृष्टिगत चैबटिया उद्यान के अधीन एक शोध केन्द्र की स्थापना की गयी,जिसका नाम ’’राजकीय पर्वतीय फल शोध’’ केन्द्र रखा गया। यह षोध केन्द्र भारत में षीतोश्ण फल उत्पादन के क्षेत्र में प्रथम षोध केन्द्र था। इस शोध केन्द्र में विभिन्न शीतोष्ण फलों की समस्याओं के निराकरण एवं कृषकों के मार्ग दर्शन हेतु चार अनुभाग स्थापित किये गये,जिनमें उद्यान अनुभाग, भू-रसायन अनुभाग,कीट अनुभाग एवं पौध रोग अनुभाग थे। इन अनुभागों द्वारा अपने-अपने क्षेत्र में शोध के माध्यम से इन फलों को व्यवसायिक रूप से उगाने हेतु नई तकनीकी विकसित की गयी,जिसका लाभ उद्यान को प्राप्त हुआ। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा इस कार्य हेतु निवेश एवं धन का प्राविधान किया गया और शीतोष्ण फलों के विकास हेतु एक योजना संचालित की गयी जो वर्ष 1932 से 1955 तक क्रियान्वित रही। इस योजना से पर्वतीय क्षेत्र में उद्यानों का विस्तार हुआ,और शीतोष्ण फलों का क्षेत्रफल लगातार बढता गया।

स्वतंत्रता के बाद पर्वतीय क्षेत्रों में उद्यानों के महत्व को देखते हुये वर्ष मई 1953 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उद्यान विभाग की स्थापना की,जिसका निदेशालय ’’फल उपयोग विभाग उत्तर प्रदेश,रानीखेत’’ के नाम से स्थापित किया गया, जिसका मुख्यालय रानीखेत स्थित मालरोड नामक स्थान पर किराये के भवनों में था। यह निदेशालय उत्तर प्रदेश का एक मात्र निदेशालय था,जिसका मुख्यालय पर्वतीय क्षेत्र रानीखेत में स्थापित किया गया। इस विभाग के प्रथम संस्थापक निदेशक ’’डा0 विक्टर साने’’ थे। प्रदेश के समस्त जिलों में जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय स्थापित किये गये, एवं मंडलों में उपनिदेशक कार्यालयों की स्थापना की गयी। स्थापना के समय से यह विभाग पर्वतीय क्षेंत्रों में बागवानी के समग्र विकास हेतु प्रयासरत है। जनवरी 1974 में इस निदेशालय का नाम ’’उद्यान एवं फल उपयोग विभाग,उत्तर प्रदेश’’ रखा गया,तथा ’’पर्वतीय फल शोध केन्द’’ का नाम ’’औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केन्द्र’’ में परिवर्तित कर दिया गया। औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केन्द्र का विस्तार कर उसमें पौध दैहिकी,पौध अभिजन्न,मशरूम एवं मौन पालन में भी कार्य प्रारम्भ कर प्राप्त परिणामों को प्रशिक्षण के माध्यम से विभागीय अधिकारी, कर्मचारी एवं स्थानीय कास्तकारों को प्रशिक्षण दिया जाने लगा। इस दौरान विभाग में सब्जी,मसाला, आलू एवं पुष्प फसलों पर भी कार्य प्रारम्भ हुआ। इस दौरान विभाग द्वारा अन्य पर्वतीय राज्यों जैसे-हिमाचल प्रदेश,जम्मू कश्मीर, मणिपुर, सिक्किम तथा पड़ोसी देश भूटान, नेपाल अफगानिस्तान को पौध रोपण सामग्री उपलब्ध करायी, एवं उनके प्रसार कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण भी प्रदान किया। वर्ष सितम्बर,1990 में विभाग का नाम ’’उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग,उत्तर प्रदेश’’ रखा गया ,तथा ’’वर्र्ष 1992-93 में उद्यान भवन,चैबटिया’’ के नाम से नवनिर्मित भवन में निदेषालय स्थानान्तरित हो गया।

वर्ष 2000 में उत्तराखण्ड निर्माण के बाद वर्तमान में प्रदेश में सभी 13 जिलों में जिला उद्यान अधिकारी के कार्यालय स्थापित है, एवं कुमाॅयू तथा गढवाल मंडलों में उपनिदेशक उद्यान के कार्यालय स्थापित है। शोध से संबंधित कार्य वर्ष 2004 में पंतनगर विश्वविद्यालय को हस्तान्तरित कर दिया गया हैं। वर्तमान में दो मंडलीय प्रशिक्षण एवं परीक्षण केन्द्र स्थापित है,जो कि चैबटिया एवं श्रीनगर गढवाल में स्थापित है,इनके द्वारा कास्तकारों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

पता

निदेशालय उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण, उत्तराखण्ड,

उद्यान भवन, चैबटिया-रानीखेत, अल्मोड़ा उत्तराखण्ड

दूरभाश- 05966-220260 / 222792

हमारा स्थान

चित्र प्रदर्शनी